गाजियाबाद क्राइम ब्रांच हेड अब्दुल रहमान सिद्दीकी
यूपी एक बार फिर कटघरे में है. गाजियाबाद के क्राइम ब्रांच हेड अब्दुल रहमान सिद्दीकी पर आरोप है कि वो न सिर्फ बदमाशों से मिला हुआ था बल्कि पीड़ित महिला को ही धमकाने का भी उस पर आरोप है. साथ ही धर्मांतरण के आरोपियों को संरक्षण देता था. यह मामला सामने आने के बाद यूपी में सियासत भी चरम पर पहुंच गया है. प्रशासनिक हलकों में तो हड़कंप की स्थिति है. आखिर कौन है सिद्दीकी और क्या है पूरा मामला, जानें विस्तार से.
कौन है सिद्दीकी?
गाजियाबाद क्राइम ब्रांच हेड अब्दुल रहमान सिद्दीकी गाजियाबाद क्राइम ब्रांच का हेड बताया जाता है, जो अब तक कई बड़े मामलों की जांच कर चुका है, लेकिन हालिया खुलासों ने उसकी पूरी साख पर सवालिया निशान लगा दिया है. बताया जा रहा है कि सिद्दीकी का संबंध गाजियाबाद के कुख्यात बदमाश 'छांगुर' से था, जो संगठित अपराध और अवैध कब्जों के मामलों में कई बार जेल जा चुका है.
पीड़िता को धमकाने का आरोप?
यह मामला मेरठ की एक महिला पीड़िता से जुड़ा है, जिसने छांगुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप है कि इस केस की जांच कर रहे सिद्दीकी ने ही पीड़िता को फोन कर धमकाया और मामला वापस लेने का दबाव डाला. पीड़िता ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की और ऑडियो क्लिप भी सौंपी, जिसमें कथित तौर पर सिद्दीकी की धमकी भरी आवाज है.
सिद्दीकी सस्पेंड, जांच शुरू
एसएसपी गाजियाबाद ने इस पूरे मामले पर जांच बैठा दी है. फिलहाल, उसे सस्पेंड कर दिया गया है. दूसरी तरफ इंस्पेक्टर सिद्दीकी को सस्पेंड कर दिया गया है. यह मामला सामने आने के बाद पीड़िता की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. प्राथमिक जांच में आरोपों को गंभीर माना गया है और सिद्दीकी की कॉल डिटेल्स और ऑडियो क्लिप की जांच की जा रही है.
छांगुर बाबा गैंग और गाजियाबाद कनेक्शन छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन और उसके सहयोगी बदर अख्तर सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की हिंदू और सिख लड़कियों को निशाना बनाकर प्रेमजाल, धमकी और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल कर उनका धर्मांतरण कराया था. गाजियाबाद के गोविंदपुरम इलाके से एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी 2019 से लापता है और बदर अख्तर सिद्दीकी ने उसे दुबई ले जाने का झांसा देकर गायब कर दिया.
परिवार का दावा है कि इस गैंग ने 18 से 25 साल की 7 से 8 अन्य हिंदू लड़कियों को भी इसी तरह गायब किया है. उत्तर प्रदेश एटीएस ने 5 जुलाई 2025 को छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला कि दोनों के नेटवर्क को पाकिस्तान, दुबई, सऊदी अरब और तुर्की से 100-200 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली थी, जिसका उपयोग धर्मांतरण और देशविरोधी गतिविधियों में किया गया. गाजियाबाद में इस रैकेट का संचालन बदर अख्तर सिद्दीकी कर रहा था.
लद्दाख के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक
Modi Govt Action on Sonam Wangchuk: सरकार ने लद्दाख के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के जरिये संचालित गैर-लाभकारी संगठन (NGO) का FCRA पंजीकरण रद्द कर दिया है. इसका कारण संगठन के जरिये विदेशी फंडिंग संबंधी कानूनों का बार-बार उल्लंघन बताया गया है. यह फैसला वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए हिंसक आंदोलनों के ठीक 24 घंटे बाद आया. अभी तक वांगचुक की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है.
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सोनम वांगचुक के जरिये स्थापित संस्था के खिलाफ विदेशी फंडिंग उल्लंघन की जांच कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, यह जांच कुछ समय से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है. वांगचुक ने बताया कि लगभग 10 दिन पहले CBI की एक टीम हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) पहुंची थी. टीम के पास गृह मंत्रालय की शिकायत के तहत FCRA उल्लंघन की जांच का आदेश था.
क्या है आरोप?
सोनम वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने कानून का उल्लंघन करते हुए NGO के FCRA खाते में 3.35 लाख रुपये जमा कराए. संस्था ने बताया कि यह राशि एक पुरानी बस की बिक्री से प्राप्त हुई थी. संगठन का दावा है कि चूंकि बस FCRA फंड से खरीदी गई थी, इसलिए बिक्री की आय उसी खाते में वापस जमा की गई. हालांकि सरकार ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.
इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन, प्रवासन और खाद्य सुरक्षा से जुड़े 'युवा जागरूकता’ कार्यक्रमों के लिए एक स्वीडिश दाता द्वारा दिए गए 4.93 लाख रुपये के फंड पर भी सवाल उठाए गए. सरकार ने इसे 'राष्ट्रीय हित के विरुद्ध’ बताया. इसी तरह, दो अन्य मामलों में FCRA खातों में 19,600 रुपये और 79,200 रुपये की राशि को अनियमित मानते हुए कार्रवाई की गई.
सोनम वांगचुक को लद्दाखी राज्य आंदोलन का चेहरा माना जा रहा है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि जेल में रहना सरकार के लिए उनकी आजादी से ज्यादा समस्याएं पैदा कर सकता है. गृह मंत्रालय द्वारा हालिया हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने पर वांगचुक ने कहा कि यह उन्हें बलि का बकरा बनाने जैसी रणनीति है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कड़े जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं.
जेल जाने के लिए वांगचुक तैयार
वांगचुक ने कहा, "वे कुछ ऐसा मामला बना रहे हैं ताकि मुझे PSA के तहत गिरफ्तार करके दो साल के लिए जेल में डाला जा सके. मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन जेल में डालने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं. यह कहना कि हिंसा मेरे या किसी पार्टी द्वारा भड़की गई, समाधान की बजाय बलि का बकरा ढूंढने जैसा है."
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार रात बयान में आरोप लगाया कि वांगचुक और कुछ राजनीतिक लोगों के भड़काऊ बयानों के कारण हालिया हिंसा हुई. मंत्रालय के अनुसार, ये लोग सरकार और लद्दाखी समूहों के बीच हुई प्रगति से खुश नहीं थे. इस फैसले के बाद वांगचुक और उनके संगठन के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं और NGO गतिविधियों पर सरकारी नजर बढ़ गई है.
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मुकेश अंबानी और शाहरुख खान
हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2025 में भारत से कई बड़े नाम शामिल हुए हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी लगातार दूसरी बार भारत के सबसे अमीर शख्स बने हैं. वहीं, बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान ने पहली बार अरबपति क्लब में जगह बनाई है, जिससे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन इस साल रिकॉर्ड 358 डॉलर-अरबपतियों की सूची में शामिल हुए.
अंबानी परिवार ₹9.55 लाख करोड़ की कुल संपत्ति के साथ शीर्ष स्थान पर है. जबकि गौतम अडानी और उनका परिवार ₹8.15 लाख करोड़ की कुल संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर है. इससे पहले अडानी परिवार ने 2024 में शीर्ष स्थान हासिल किया था, लेकिन इस वर्ष अंबानी परिवार ने फिर से पहले स्थान पर नहीं रहे.
12,490 करोड़ के मालिक हैं शाहरुख खान
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने पहली बार हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में अरबपति के रूप में स्थान प्राप्त किया है. उनकी कुल संपत्ति ₹12,490 करोड़ (लगभग $1.4 बिलियन) है, जो उन्हें भारत के सबसे अमीर अभिनेता बनाती है. यह उपलब्धि उनके प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स, रियल एस्टेट निवेश और लक्जरी कार कलेक्शन से अर्जित संपत्ति के कारण संभव हुई है.
हुरुन रिच लिस्ट 2025, मुकेश अंबानी, शाहरुख खान, अरबपति क्लब, भारत के सबसे अमीर व्यक्ति, रिलायंस इंडस्ट्रीज, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट, अडानी समूह, एचसीएल टेक्नोलॉजीज
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने पहली बार हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में अरबपति के रूप में स्थान प्राप्त किया है. उनकी कुल संपत्ति ₹12,490 करोड़ (लगभग $1.4 बिलियन) है, जो उन्हें भारत के सबसे अमीर अभिनेता बनाती है. यह उपलब्धि उनके प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स, रियल एस्टेट निवेश और लक्जरी कार कलेक्शन से अर्जित संपत्ति के कारण संभव हुई है.
हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची इस प्रकार है:
मुकेश अंबानी और परिवार – ₹9.55 लाख करोड़ (Reliance Industries)
गौतम अडानी और परिवार – ₹8.15 लाख करोड़ (Adani Group)
रोशनी नादर मल्होत्रा और परिवार – ₹2.84 लाख करोड़ (HCL Technologies)
कुमार मंगलम बिड़ला और परिवार – ₹2.51 लाख करोड़ (Aditya Birla Group)
सायरस पूनावाला और परिवार – ₹2.50 लाख करोड़ (Serum Institute of India)
नीरज बजाज और परिवार – ₹2.33 लाख करोड़ (Bajaj Group)
अजीम प्रेमजी और परिवार – ₹2.30 लाख करोड़ (Wipro)
शिव नादर और परिवार – ₹2.20 लाख करोड़ (HCL Technologies)
कृष्णमूर्ति अय्यर और परिवार – ₹2.10 लाख करोड़ (TVS Group)
कृष्णमूर्ति अय्यर और परिवार – ₹2.00 लाख करोड़ (TVS Group)
भारतीय अमीरों की सूची में अहम बदलाव यह है कि मुकेश अंबानी ने गौतम अडानी को पछाड़ते हुए फिर से शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं. रोशनी नादर मल्होत्रा ने HCL Technologies में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर तीसरे स्थान पर कब्जा किया है, जिससे वह भारत की सबसे अमीर महिला बन गई हैं. इसके अलावा, बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान ने ₹12,490 करोड़ की संपत्ति के साथ पहली बार अरबपति क्लब में प्रवेश किया है.
दीघा-बरबीघा की दिलचस्प कहानी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है. चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं. आम से लेकर खास तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करने में जुटे हैं. ऐसे में लोगों के लिए एक दिलचस्प सवाल यह है कि बिहार का सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र कौन सा है? अगर आपको इसका जवाब नहीं मालूम है तो हम बताते हैं बिहार के सबसे बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र के बारे में. बिहार में दीघा विधानसभा सीट एक ओर पटना की चमक दमक से जुड़ा है तो दूसरी ओर बरबीघा छोटे शहर शेखपुरा में बसा है, पर इतिहास से जुड़ा होने के कारण अपने आप में खास है.
दीघा'
पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव 2024 के मतदाता सूची अपडेट के अनुसार वोटरों की संख्या 4,73,108 है. विधानसभा चुनाव 2020 में 4,60,868 मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज थे. इसमें दीघा विधानसभा क्षेत्र में 400 बूथ हैं. यह विधानसभा क्षेत्र में पटना के प्रमुख आवासीय इलाकों में से पाटलिपुत्र हाउसिंग कॉलोनी, पटना का मरीन ड्राइव, दीघा घाट, अटल पथ, जेपी सेतु पाटलिपुत्र कॉलोनी, राजीव नगर जैसे खास इलाके आते हैं. न्यू पटना का यह अहम हिस्सा है. पटना में मौजूद दीघा विधानसभा क्षेत्र गंगा नदी के किनारे बसा है. यह क्षेत्र पटना नगर निगम के 14 वार्डों और छह पंचायतों में फैला हुआ है. यह पटना साहिब लोकसभा सीट के छह खंडों में से एक है.
2008 में संपन्न चुनावी परिसीमन में दीघा विधानसभा अलग से बना था. यही वजह है कि इस विधानसभा का चुनावी इतिहास बहुत छोटा है. साल 2008 में अस्तित्व में आने के बाद यहां पहली बार 2010 में चुनाव हुआ. पहली बार विधानसभा चुनाव में जेडीयू की पूनम देवी जीतने में सफल हुई थी. इसके बाद 2015 और 2020 में तीसरी बार चुनाव हुआ. चौथी बार 2025 में चुनाव की तैयारी है.
एनडीए की सीट
साल 2010 में जेडीयू को जीत मिली. साल 2015 से अब तक लगातार बीजेपी के संजीव चौरसिया जीतते आ रहे हैं. इस लिहाज से दीघा सीट को एनडीए की परंपरागत विधानसभा क्षेत्र है. जबकि इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा यादव मतदाता रहते हैं. इस क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 95 हजार, मुस्लिमों की 25 हजार, भूमिहार, ब्राह्मण, कायस्थ, राजपूत, कोइरी, कुर्मी, वैश्य समुदायों की 30 से 40 हजार मतदाता रहते हैं. हालांकि, यहां पर कायस्थ और महिला वोटर भी अहम भूमिका निभाते हैं.
बरबीघा
बरबीघा बिहार के शेखपुरा जिले का बारबीघा विधानसभा सीट मतदाताओं की संख्या के हिसाब से बिहार की सबसे छोटी सीट है. इस क्षेत्र में लगभग 2.15 लाख मतदाता हैं, जो इसे सबसे कम मतदाता संख्या वाली विधानसभा सीट बनाता है. बरबीघा विधानसभा सबसे छोटा लेकिन ऐतिहासिक क्षेत्र: बरबीघा विधानसभा शेखपुरा जिले में स्थित है और 1994 में मुंगेर से अलग होकर अस्तित्व में आया. नवादा संसदीय क्षेत्र में बरबीघा विधानसभा आता है बरबीघा विधानसभा में 2 लाख 26165 मतदाता 2020 में थे. हालांकि लोकसभा चुनाव में बढ़कर 2 लाख 32994 हो गया है इस बार इनकी संख्या कुछ और बढ़ सकती है. पहले CM का जन्म स्थान है बरबीघा श्रीकृष्ण सिंह और दिनकर की भूमि बरबीघा सीट जन्मभूमि है. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी एक दौर में बरबीघा के विद्यालय में प्रधानाचार्य रह चुके हैं. कांग्रेस का कभी यह क्षेत्र गढ़ रहा है. यह क्षेत्र अब जेडीयू के विधायक के सुदर्शन के पास है.
भूमिहार मतदाता अहम
बरबीघा विधानसभा सीट पर भूमिहार मतदाता सबसे प्रभावशाली वोट बैंक में शुमार है. इस समुदाय के मतदाता चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. लगभग 20 प्रतिशत से अधिक आबादी इन्ही की है. यह समुदाय चुनावों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है. इसके अलावा कुर्मी, यादव और पासवान (महादलित) जातियां भी महत्वपूर्ण वोट विभाजन का हिस्सा बनते हैं. यह सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस ने 17 विधानसभा चुनावों में से कम-से-कम 10 में जीत दर्ज की है.